नारियों के ‘‘नाम’’ पर विशेष ‘‘कविता’’

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आभा, प्रभा, प्रतिभा, प्रेरणा की प्रेरक है नारी!!
आरती, पूजा, प्रार्थना, वंदना, आराध्ना की ‘‘साधना’’ है नारी!!
ममता, क्षमता, संतोष, मध्ु की बहती मध्ुर ‘‘सरिता’’ है नारी!!
गंगा, जमुना, सरस्वती की पवित्रा ‘‘धरा’’ है नारी!!
चंदा, तारा, सितारा सविता किरण की ‘‘रोशनी’’ है नारी!!
हीरा, मेाती, रत्न, सोना, नीलम की अद्वितीय ‘‘नगीना’’ है नारी!!
वीणा, संगीता, निपूर पायर, की मध्ु ‘‘काकली’’ ध्ून है नारी!!
गुलाबी, मोगरी, सुमन की ‘‘महक’’ है नारी!!
नीलिमा, लालिमा, स्वेता हर रंग की रंगोली में है नारी!!
नम्रता, काजल, सपना आंखों की ‘‘कोमल’’ ‘‘पलक’’ में सजा कर रखती है नारी!!
वसुन्ध्रा, ध्रा, दिशा भी अध्ूरी है बिना नारी!!
कवियों की ‘‘कविता’’ रचना भी अध्ूरी है बिन नारी!!
– सुशील जैन

परिवार

परिवार से बड़ा कोई ध्न नहींऋ
माँ की छांव से बड़ी कोई दुनिया नहींऋ
पिता से बड़ा सलाहकार कोई नहींऋ
भाई से अच्छा कोई भागीदार नहींऋ
बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहींऋ
पत्नी से बड़ा दोस्त नहींऋ

परिवार से हित ही हितः–

परिवार परिचय है!
परिवार परिचायक है!
परिवार परिचालक है!
परिवार परिजन है!
परिवार परितोष है!
परिवार परिपाश्र्व है!
परिवार परिभाषा है!
परिवार परिमल है!
परिवार परिभूषित है!
परिवार परिवास है!
परिवार परिशीलन है!
परिवार परिषद् है!
परिवार परिपूर्ण परिसर है!

– सुशील जैन

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