श्रवणबेलगोला का इतिहास

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भारत के सात भारत के सात आश्चर्यों में शामिल श्रवणबेलगोला। ज्ञात हो कि भारत के 7 महान आश्चर्य निम्न हैं- श्रवणबेलगोला (कर्नाटक, गोमतेश्वर), हरमंदिर साहिब (पंजाब-अमृतसर, स्वर्ण मंदिर), ताजमहल (आगरा), हाम्पी (उत्तरी कर्नाटक), कोणार्क (उड़ीसा), नालंदा (बिहार), खजुराहो (एमपी)। श्रवणबेलगोला प्राचीन तीर्थस्थल कर्नाटक राज्य के हासन जिले में स्थित है। यह भारतीय राज्य कर्नाटक के मड्या जिले में श्रवणबेलगोला के गोम्मटेश्वर स्थान पर स्थित है। यह बेंगलुरु शहर से लगभग 150 और मैसूर शहर से यह 80 किमी की दूरी पर है।   यहां पर भगवान बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है, जो पूर्णत: एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मूर्ति को बनाने में मूर्तिकार को लगभग 12 वर्ष लगे। बाहुबली को गोम्मटेश्वर भी कहा जाता था।   श्रवणबेलगोला में गोम्मटेश्वर द्वार के बाईं ओर एक पाषाण पर शक सं. 1102 का एक लेख कानड़ी भाषा में है। इसके अनुसार ऋषभ के 2 पुत्र भरत और बाहुबली थे। ऋषभदेव के जंगल चले जाने के बाद राज्याधिकार के लिए बाहुबली और भरत में युद्ध हुआ। बाहुबली ने युद्ध में भरत को परास्त कर दिया।   लेकिन इस घटना के बाद उनके मन में भी विरक्ति भाव जाग्रत हुआ और उन्होंने भरत को राजपाट ले लेने को कहा, तब वे खुद घोर तपश्चरण में लीन हो गए। तपस्या के पश्चात उनको यहीं पर केवलज्ञान प्राप्त हुआ। भरत ने बाहुबली के सम्मान में पोदनपुर में 525 धनुष की बाहुबली की मूर्ति प्रतिष्ठित की। प्रथम सबसे विशाल प्रतिमा का यहां उल्लेख है।   कालांतर में मूर्ति के आसपास का प्रदेश वन कुक्कुटों तथा सर्पों से व्याप्त हो गया जिससे लोग मूर्ति को ही कुक्कुटेश्वर कहने लगे। भयानक जंगल होने के कारण यहां कोई पहुंच नहीं पाता था इसलिए यह मूर्ति लोगों की स्मृति से लुप्त हो गई।   गंगवंशीय रायमल्ल के मंत्री चामुंडा राय ने इस मूर्ति का वृत्तांत सुनकर इसके दर्शन करने चाहे किंतु पोदनपुर की यात्रा कठिन समझकर श्रवणबेलगोला में उन्होंने पोदनपुर की मूर्ति के अनुरूप ही गोम्मटेश्वर की मूर्ति का निर्माण करवाया। गोम्मटेश्वर की मूर्ति संसार की विशालतम मूर्तियों में से एक मानी जाती है।   श्रवणबेलगोला में चन्द्रगिरि और विंध्यगिरि नाम की 2 पहाड़ियां पास-पास हैं। पहाड़ पर 57 फुट ऊंची बाहुबली की प्रतिमा विराजमान है। यहां हर 12 वर्ष बाद महामस्तकाभिषेक होता है।   कैसे पहुंचें   सड़क मार्ग : मुंबई से श्रवणबेलगोला वैसे तो आप सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान आपको 974 किमी से भी ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। यह सफर काफी लंबा होगा। ऐसे में विमान और ट्रेन से बेंगलुरु पहुंचकर सड़क मार्ग एक अच्छा विकल्प हो सकता है।   विमान सेवा : मुंबई से बेंगलुरु के लिए लगभग डेढ़ घंटे की सीधी विमान की सेवा है। एयरपोर्ट से 3 घंटे में आप श्रवणबेलगोला पहुंच जाएंगे। बेंगलुरु एयरपोर्ट उतरने के बाद वहां से टैक्सी, बस, ट्रेन सभी उपलब्ध हैं।   रेल मार्ग : मुंबई से कई ट्रेनें बेंगलुरु के लिए जाती हैं और बेंगलुरु से श्रवणबेलगोला के लिए भी ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है।

भारत के सात भारत के सात आश्चर्यों में शामिल श्रवणबेलगोला। ज्ञात हो कि भारत के 7 महान आश्चर्य निम्न हैं- श्रवणबेलगोला (कर्नाटक, गोमतेश्वर), हरमंदिर साहिब (पंजाब-अमृतसर, स्वर्ण मंदिर), ताजमहल (आगरा), हाम्पी (उत्तरी कर्नाटक), कोणार्क (उड़ीसा), नालंदा (बिहार), खजुराहो (एमपी)। श्रवणबेलगोला प्राचीन तीर्थस्थल कर्नाटक राज्य के हासन जिले में स्थित है। यह भारतीय राज्य कर्नाटक के मड्या जिले में श्रवणबेलगोला के गोम्मटेश्वर स्थान पर स्थित है। यह बेंगलुरु शहर से लगभग 150 और मैसूर शहर से यह 80 किमी की दूरी पर है।   यहां पर भगवान बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है, जो पूर्णत: एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मूर्ति को बनाने में मूर्तिकार को लगभग 12 वर्ष लगे। बाहुबली को गोम्मटेश्वर भी कहा जाता था।   श्रवणबेलगोला में गोम्मटेश्वर द्वार के बाईं ओर एक पाषाण पर शक सं. 1102 का एक लेख कानड़ी भाषा में है। इसके अनुसार ऋषभ के 2 पुत्र भरत और बाहुबली थे। ऋषभदेव के जंगल चले जाने के बाद राज्याधिकार के लिए बाहुबली और भरत में युद्ध हुआ। बाहुबली ने युद्ध में भरत को परास्त कर दिया।   लेकिन इस घटना के बाद उनके मन में भी विरक्ति भाव जाग्रत हुआ और उन्होंने भरत को राजपाट ले लेने को कहा, तब वे खुद घोर तपश्चरण में लीन हो गए। तपस्या के पश्चात उनको यहीं पर केवलज्ञान प्राप्त हुआ। भरत ने बाहुबली के सम्मान में पोदनपुर में 525 धनुष की बाहुबली की मूर्ति प्रतिष्ठित की। प्रथम सबसे विशाल प्रतिमा का यहां उल्लेख है।   कालांतर में मूर्ति के आसपास का प्रदेश वन कुक्कुटों तथा सर्पों से व्याप्त हो गया जिससे लोग मूर्ति को ही कुक्कुटेश्वर कहने लगे। भयानक जंगल होने के कारण यहां कोई पहुंच नहीं पाता था इसलिए यह मूर्ति लोगों की स्मृति से लुप्त हो गई।   गंगवंशीय रायमल्ल के मंत्री चामुंडा राय ने इस मूर्ति का वृत्तांत सुनकर इसके दर्शन करने चाहे किंतु पोदनपुर की यात्रा कठिन समझकर श्रवणबेलगोला में उन्होंने पोदनपुर की मूर्ति के अनुरूप ही गोम्मटेश्वर की मूर्ति का निर्माण करवाया। गोम्मटेश्वर की मूर्ति संसार की विशालतम मूर्तियों में से एक मानी जाती है।   श्रवणबेलगोला में चन्द्रगिरि और विंध्यगिरि नाम की 2 पहाड़ियां पास-पास हैं। पहाड़ पर 57 फुट ऊंची बाहुबली की प्रतिमा विराजमान है। यहां हर 12 वर्ष बाद महामस्तकाभिषेक होता है।   कैसे पहुंचें   सड़क मार्ग : मुंबई से श्रवणबेलगोला वैसे तो आप सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान आपको 974 किमी से भी ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। यह सफर काफी लंबा होगा। ऐसे में विमान और ट्रेन से बेंगलुरु पहुंचकर सड़क मार्ग एक अच्छा विकल्प हो सकता है।   विमान सेवा : मुंबई से बेंगलुरु के लिए लगभग डेढ़ घंटे की सीधी विमान की सेवा है। एयरपोर्ट से 3 घंटे में आप श्रवणबेलगोला पहुंच जाएंगे। बेंगलुरु एयरपोर्ट उतरने के बाद वहां से टैक्सी, बस, ट्रेन सभी उपलब्ध हैं।   रेल मार्ग : मुंबई से कई ट्रेनें बेंगलुरु के लिए जाती हैं और बेंगलुरु से श्रवणबेलगोला के लिए भी ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है।

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