जीवन में अर्थी उठे उससे पहले अर्थ को समझ लें: मुनि मुनि श्री सबुद्ध सागर जी महाराज

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रामगंजमंडी समाज की ने नगर आगमन एवं वर्षायोग हेतु किया श्रीपफल भेंट
कोटा ;विश्व परिवारद्ध। आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य मुनि द्वय मुनि श्री 108 संबु( सागर जी महाराज व मुनि श्री 108 सक्षम सागर जी महाराज आर. के. पुरम स्थित श्री 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन त्रिकाल चैबीसी मंदिर में विराजित है। मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष सूरजमल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर रामगंजमंडी समाज के प्रतिनिध् िमंडल ने मुनि संघ को रामगंजमंडी आगमन व वर्षायोग हेतु श्रीपफल समर्पित किया और निवेदन किया। मुनि संघ ने निवेदन को सुना और नगर की भक्ति की अनुमोदना की रामगंजमंडी नगर की ओर से श्री भूपेंद्र साँवला, शान्तिलाल मित्तल, पदमकुमार लुहाडिया, शोभना साँवला, सुलोचना लुहाडिया, शंकुन्तला मित्तल व ललिता विनायका सम्मलित रहीं।
मंगल उद्बोधन में मुनि श्री संबु( सागर जी महाराज ने मार्मिक उदगार प्रकट करते हुए कहा जीवन में अर्थी उठे उससे पहले जीवन का अर्थ समझ लो। चिता जले उससे पहले चेतना जगा ले। उन्होनें कहा जीवन में जितने पफूल है, उतने काटे भी मिलते है। चैरासी लाख योनियों में भटकने के बाद चिंतामणि रत्न के समान मनुष्य योनि मिली है। जो नर से नारायण पाषाण से परमात्मा कंकर से शंकर बनने के लिए मिला है। मुनि श्री ने कहा बाण तीर सामने दुश्मन भी है यदि आपके पास बाण चलाने का ज्ञान नहीं है तो सब बेकार हैं। मुनि सक्षम सागर जी ने भी अपने विचारों से श्र(ालुओं को भाव विभोर कर दिया। ध्र्म सभा में कि चंद्रेश जैन इंजीनियर राजेश खटोड़ ललित जैन लुग्या पारस जैन पाश्र्वमणि पारस लुग्या पंकज जैन अमोलक चन्द जैन आदि उपस्थित थे।
– पारस जैन पाश्र्वमणि

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