पीपल के औषधीय उपयोग

अकेला ऐसा पौध जो दिन और रात दोनांे समय आक्सीजन देता है। पीपल के ताजा 6-7 पत्ते लेकर 400 ग्राम पानी में डालकर 100 ग्राम रहने तक उबालें, बर्तन एल्यूमीनियम का नहीं हो, आपका हृदय एक ही दिन में ठीक होना शुरू हो जाएगा। पीपल के पत्तों पर भोजन करें, लीवर ठीक हो जाता है। […]

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कपालभाती यह केवल एक प्राणायाम ही नही, बल्कि स्वंय को पूर्ण करने वाली क्रिया है

सुभाष चन्द जैन डाॅ. घोसालकर, डठठै, ने कपालभाती के विषय में अच्छी जानकारी दी है। कपालभाती को बीमारी दूर करनेवाले प्राणायाम के रूप में देखा जाता है। मैंने ऐसे मरीजों को देखा है, जो बिना बैसाखी के चल नहीं पाते थे, लेकिन नियमित कपालभाती करने के बाद उनकी बैसाखी छूट गई और वे ना सिपर्फ […]

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पृथ्वी शेषनाग पर नहीं बल्कि हमारे विश्वास पर टिकी हैः आचार्य प्रसन्नसागर जी महाराज ग्वालियर किरण।

निमियाघाट/कोडरमा – अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता साध्ना महोदध् िभारत गौरव उभय मासोपासी आचार्य प्रसन्नसागर जी महाराज निमियाघाट के सहस्त्रा वर्ष पुरानी भगवान पारसनाथ की वरदानी छांव तले विश्व हितांकर विघ्न हरण चिंतामणि पारसनाथ जिनेंद्र महाअर्चना महोत्सव पर भक्त समुदाय को संबोध्ति करते हुए। अंतर्मना प्रसन्नसागरजी ने कहा – जीवन में जो महत्व श्वास का […]

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जीवन में अर्थी उठे उससे पहले अर्थ को समझ लें: मुनि मुनि श्री सबुद्ध सागर जी महाराज

रामगंजमंडी समाज की ने नगर आगमन एवं वर्षायोग हेतु किया श्रीपफल भेंट कोटा ;विश्व परिवारद्ध। आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य मुनि द्वय मुनि श्री 108 संबु( सागर जी महाराज व मुनि श्री 108 सक्षम सागर जी महाराज आर. के. पुरम स्थित श्री 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन त्रिकाल चैबीसी मंदिर […]

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आदिपुरुष श्री रिषभदेव भगवान

इस अवसर्पिणी काल के तीसरे भाग के अन्त में प्रथम तीर्थकर वृषभदेव का जन्म हुआ। देवों और मनुष्यों ने मिलकर उत्सव मनाया। वे जन्म से ही अवध्ज्ञिानी थे, उन्हें ज्ञान के लिए किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं थी। उनमें सभी सदगुण विद्यमान थे। कच्छ और महाकच्छ की दो बहनें थीं, वृषभदेव को विवाही गई। यशस्वती […]

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भगवान महावीर का गुरू नानक देव जी पर प्रभाव

डाॅ अनेकान्त कुमार जैन पानीपत हरियाणा संगम ब्यूरो जैन श्रमण परंपरा के प्रथम तीर्थंकर )षभदेव आदि योगी तथा इतिहास की दृष्टि से प्रागैतिहासिक माने जाते हैं। उनके अनंतर जैन श्रमण परम्परा में 23 और तीर्थकर हुए जिन्होंने समय समय पर ध्र्म तीर्थ का प्रवर्तन किया तथा अंतिम तीर्थकर भगवान महावीर का जन्म ईसा पूर्व 599 […]

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मानवता के मसीहा

भगवान महावीर व आचार्य प्रसन्नसागर महावीर दीपचंद ठोले, दुनिया में दो तरह के महापुरुष हुए हैं, एक वे जिन्होंने संसार को महान विचार दिये जो चिंतक, विचारक और दार्शनिक कहलाते हैं। दूसरे वे जिन्होंने संसार को महान जीवन दिया, जीवन जीने की कला सिखलाई, वे ‘मानवता के मसीहा’ बन जाते हैं। भगवान महावीर का जीवन […]

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‘महासभा के स्वर्णिम काल खंड का अंत

डाॅ. ज्योत्स्ना जैन, राष्ट्रीय महामंत्राी-श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा ‘चले जाते हैं जो जहां से रह जाती हैं स्मृतियां शेष बनते सदा पथ प्रदर्शक होते हैं जो कर विशेष।’ श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के सर्वाध्कि सशक्त किरदार का इस तरह पटाक्षेप होगा किसने सोचा था? श्री निर्मल कुमार जैन सेठी जैसा असाधरण व्यक्तित्व […]

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श्रुतपंचमी मनाने का कारण

किशोर पाटनी प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ला पंचमी को जैन समाज में, श्रुतपंचमी पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पीछे एक इतिहास है, जो निम्नलिखित है- श्री वर्द्धमान जिनेन्द्र के मुख से श्री इन्द्रभूति (गौतम) गणधर ने श्रुत को धारण किया। उनसे सुधर्माचार्य ने और उनसे जम्बूस्वामी नामक अंतिम केवली ने ग्रहण किया। भगवान […]

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पावापुरी-नालन्दा का पुरातत्त्व

सरिता महेन्द्र वुफ. जैन, राष्ट्रीयाध्यक्षा श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा पावापुरी बिहार के नालन्दा जिला में स्थित है। इसके पावापुर, अपापपुरी, पावा आदि नाम भी हैं। जैनध्र्म के चैबीस तीर्थंकरों की श्रृंखला में अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का निर्वाण अब से 2547 वर्ष पूर्व इसी पावापुर या पावापुरी से हुआ था। यहां तीर्थंकर भगवान […]

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