आदिपुरुष श्री रिषभदेव भगवान

इस अवसर्पिणी काल के तीसरे भाग के अन्त में प्रथम तीर्थकर वृषभदेव का जन्म हुआ। देवों और मनुष्यों ने मिलकर उत्सव मनाया। वे जन्म से ही अवध्ज्ञिानी थे, उन्हें ज्ञान के लिए किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं थी। उनमें सभी सदगुण विद्यमान थे। कच्छ और महाकच्छ की दो बहनें थीं, वृषभदेव को विवाही गई। यशस्वती […]

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नारियों के ‘‘नाम’’ पर विशेष ‘‘कविता’’

आभा, प्रभा, प्रतिभा, प्रेरणा की प्रेरक है नारी!! आरती, पूजा, प्रार्थना, वंदना, आराध्ना की ‘‘साधना’’ है नारी!! ममता, क्षमता, संतोष, मध्ु की बहती मध्ुर ‘‘सरिता’’ है नारी!! गंगा, जमुना, सरस्वती की पवित्रा ‘‘धरा’’ है नारी!! चंदा, तारा, सितारा सविता किरण की ‘‘रोशनी’’ है नारी!! हीरा, मेाती, रत्न, सोना, नीलम की अद्वितीय ‘‘नगीना’’ है नारी!! वीणा, […]

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भगवान महावीर का गुरू नानक देव जी पर प्रभाव

डाॅ अनेकान्त कुमार जैन पानीपत हरियाणा संगम ब्यूरो जैन श्रमण परंपरा के प्रथम तीर्थंकर )षभदेव आदि योगी तथा इतिहास की दृष्टि से प्रागैतिहासिक माने जाते हैं। उनके अनंतर जैन श्रमण परम्परा में 23 और तीर्थकर हुए जिन्होंने समय समय पर ध्र्म तीर्थ का प्रवर्तन किया तथा अंतिम तीर्थकर भगवान महावीर का जन्म ईसा पूर्व 599 […]

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मानवता के मसीहा

भगवान महावीर व आचार्य प्रसन्नसागर महावीर दीपचंद ठोले, दुनिया में दो तरह के महापुरुष हुए हैं, एक वे जिन्होंने संसार को महान विचार दिये जो चिंतक, विचारक और दार्शनिक कहलाते हैं। दूसरे वे जिन्होंने संसार को महान जीवन दिया, जीवन जीने की कला सिखलाई, वे ‘मानवता के मसीहा’ बन जाते हैं। भगवान महावीर का जीवन […]

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‘महासभा के स्वर्णिम काल खंड का अंत

डाॅ. ज्योत्स्ना जैन, राष्ट्रीय महामंत्राी-श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा ‘चले जाते हैं जो जहां से रह जाती हैं स्मृतियां शेष बनते सदा पथ प्रदर्शक होते हैं जो कर विशेष।’ श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के सर्वाध्कि सशक्त किरदार का इस तरह पटाक्षेप होगा किसने सोचा था? श्री निर्मल कुमार जैन सेठी जैसा असाधरण व्यक्तित्व […]

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श्रुतपंचमी मनाने का कारण

किशोर पाटनी प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ला पंचमी को जैन समाज में, श्रुतपंचमी पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पीछे एक इतिहास है, जो निम्नलिखित है- श्री वर्द्धमान जिनेन्द्र के मुख से श्री इन्द्रभूति (गौतम) गणधर ने श्रुत को धारण किया। उनसे सुधर्माचार्य ने और उनसे जम्बूस्वामी नामक अंतिम केवली ने ग्रहण किया। भगवान […]

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पावापुरी-नालन्दा का पुरातत्त्व

सरिता महेन्द्र वुफ. जैन, राष्ट्रीयाध्यक्षा श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा पावापुरी बिहार के नालन्दा जिला में स्थित है। इसके पावापुर, अपापपुरी, पावा आदि नाम भी हैं। जैनध्र्म के चैबीस तीर्थंकरों की श्रृंखला में अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का निर्वाण अब से 2547 वर्ष पूर्व इसी पावापुर या पावापुरी से हुआ था। यहां तीर्थंकर भगवान […]

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अध्यक्षीय उदबोधन

आवाज ही हमारे जीवन की दिशा बदल देती है हर बात दूसरों पर आरोपित कर देना बुराई से छुट्टी पाने का सरल उपाय मान लिया जाता है, लेकिन है नहीं। उसने ऐसा कर दिया, इसलिए मुझे भी ऐसा करना पड़ा – यह कवच बन जाता है अपनी बुराई के लिए। जब तक अंतदृष्टि नहीं जागती, […]

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अध्यक्षीय उद्बोधन

आमतौर पर हम सब ‘योग’ के चाहने वाले हैं। योग में बहुत सारी बातें हो जाती हंै। गणित की भाषा मे ं‘योग’ याने ‘धन’। वर्षायोग – जिस प्रकार गर्मी में तपन के द्वारा समुद्री जल बादल सोखते हैं फिर योग मिलने पर वर्षा के दौरान जल की वर्षा कर देते हैं, इसी प्रकार वर्षायोग के […]

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चातुर्मास : जिनागम पंथ का अनुपम उपहार

जिनागम पंथ प्रवर्तक भावलिंगी संत श्रमणाचार्य विमर्शसागर मुनि अहा! चक्रवर्ती भरत के भारतदेश की पवित्र भूमि पर विचरण करते परम वीतरागी दिगम्बर श्रमण-श्रमणियों, उत्कृष्ट श्रावक-श्राविकाओं, अरिहंत कथित जिनागम पंथ में दृढ़ श्रद्धा रखने वाले जिनोपासक – श्रमणोपासकों एवं सद् गृहस्थों के द्वारा परम अहिंसा धर्म का शंखनाद सदा से होता आ रहा है। सभी ‘‘परस्परोग्रहो […]

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